Mile bhi to Aise

मिले भी तो ऐसे

मानो कोई साया
पिछे छूटा था
सालों पहले
दुबारा आ के
मिला हो जिस्मसे
या
जहन का कोई खाना
खुल गया हो यकायक
वहीं था सालों से
अनदेखा अनजाना
हुआ हो अहसास
बस
उसके वजूद का…
– गुरु ठाकुर

2 replies

Leave a Reply

Want to join the discussion?
Feel free to contribute!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*